Saturday, 22 December 2012

GBH...


यूँ तो जिंदगी बेहसीन थी, एक पाक ऐ नजरियें ने हसीन बना दिया !
किसी से जीना सीखा ,तो किसी को जीना सिखा गया !!
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संभल -संभल  कर चलना सीखा ,दूसरों को गिरता देख कर !
गिरा कही किसी भूल से, सबक समझा गया मुझे गिरा देखकर !!
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माँ एक देवी है जिस पर किसको नाज़ नही होता,
माँ से बढकर कभी भगवान् नही होता,
माँ नहीं होती तो तू क्या तेरा बाप नहीं होता !!
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हम तो मुर्दो से भी बात कर लेते हैं,
मगर गुरुर इतना की ,मरने के बाद भी लोग अकड़ते हैं !!
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लोग अक्सर विश्वास जीत कर, जान ले लेते हैं ,
शख्स हम ऐसे हैं, जो जान देकर विश्वास जीत लेते हैं  !!
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कल  किसने है देखा ? फिर इसकी परवाह क्यूँ करूँ !
जीना तो आज है मुझे, कल का इंतज़ार क्यूँ करूँ !!
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आकृति में विकृति नई कृति को आकृति प्रदान करती है !
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 यक़ीनन वो कांच ही होते है जो ठोकरों से बिखर जाया करते हैं, सहनशील पत्थर ही तो ठोकरों से तरासे जाते हैं !!
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लज़ीज़ दोस्ती भी उन्ही तक़दीर वालों को नसीब होती होंगी, जिन्होंने शायद खुदा से भी, जिंदगी में साँसे कम दोस्त बेशुमार मांगे होंगे !!
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कुछ तो बातें है इन लहरों में, जो कुछ कहना चाहती है
कुछ तो बातें है इन किनारों में, जो इतना सहना जानती है
कुछ अजीब सा रिश्ता है इन दोनों में
जो पल में मिलना और फिर पल में बिछड़ना चाहती है
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 सरल मन से मिला करो उम्रदराज़ लोगो से,
गर हुए खुशनसीब तो |
उम्र भर का तजुर्बा भी मिल जायेगा,
बगैर उम्र के बड़ी उम्र वालों से ||     



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