ग़ज़ल सम्राट श्री पंकज उदास जी को समर्पित उनकी ही एक मशहूर कृति का नमूना..
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तारों ने भी की कोशिश-ए-मोहब्बत,और लगे चाँद को यूँ आजमाने में |
आशिक़ी तो एक से की, पर आशिक़ हुए हज़ारों में ||
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चांदी जैसा अंग है तेरा, तन हीरे सा कमाल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल
कंचन लोचन चमक चांदनी सब में तेरा नूर
पुष्प लता गजरे कजरे सब होते तुझसे पूर्ण
सुंदर सजीली रानी जग की तू एकलौती हूर
गोरी तेरी एक झलक से होते लोग निहाल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल
बिखरे इतराते झुल्फ़ में नादाँ उलझते लोग
नशीं नशीली आँखों से तेरी भर जाम पाते लोग
नगमे बनते अदा से तेरी शायर बनते लोग
मस्त मस्तानी गोरी तेरी, मोहित करती चाल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल
तू मल्लिका हुश्न की ऐसी रातों ख्वाब जगाये
सुरमा सजे आँखों से तेरी मोर पंख सकुचाये
मधु मधुर सी बोली तेरी कोयल भी शरमाये
सरगम बरसे जुबां से तेरी, कहते लोग कमाल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल
तेरे हुश्न के चर्चे ऐसे पलक बिछाते लोग
देख देख तुझे महबूबा श्रृंगार सजाते लोग
तू जो हँसें तो नूरी ईद मनाते लोग
सदा मुस्काती रहो कुसुम सी, 'गायकी' करे ख्याल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल
चांदी जैसा अंग है तेरा, तन हीरे सा कमाल
एक तू ही धनवान है छोरी, बाकी सब कंगाल