वर्षों का ख्वाब तुम ,इस जिन्दगी की तलाश तुम
एक अजनबी सा अहसास तुम ,बेचैन दिल की खास तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
अकेलेपन में अपने का अहसास तुम ,गुजरती साँसों की तलाश तुम
हर कल्पना में कृति तुम , हर रचना में मूर्ति तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
मन की अनसुनी आवाज़ तुम , हर ख्वाब में मुमताज तुम
इस धडकती दिल की अनकही राज़ तुम ,जिन्दगी मेरी संगीत और इसकी साज तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
रंगीले सपनो का संसार तुम, इस मधुर जीवन का श्रंगार तुम
उम्मीदों की अभिसार तुम, जीवन में खुदा का उपहार तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
लबों में लाये मुस्कान तुम्हारी बात ,तुम्हारे दीदार की आरजू दिन और रात
ख्वाबों में होती तुमसे मुलाक़ात , तुम हो बेशक जिन्दगी की सौगात
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
जिसकी हर एक अदा पर बन जाता ग़ज़ल ,जिसकी सादगी से शरमा जाता कमल
अंदाज जिसकी करती कायल , याद जिसकी करती घायल
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
जिंदगी के सपने संजोये जिसके साथ ,जिसके हाथों को थामने बेताब मेरे हाथ
जिंदगी ढूँढती जिसे पाथ-पाथ , चलेगी जिन्दगी जिसके साथ साथ
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
ये सब संभावनाएं है ,संभव बनाने का आस तुम ,
ये सब कल्पनाएँ है , साकार बनाने का विश्वास तुम ,
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
एक अजनबी सा अहसास तुम ,बेचैन दिल की खास तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
अकेलेपन में अपने का अहसास तुम ,गुजरती साँसों की तलाश तुम
हर कल्पना में कृति तुम , हर रचना में मूर्ति तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
मन की अनसुनी आवाज़ तुम , हर ख्वाब में मुमताज तुम
इस धडकती दिल की अनकही राज़ तुम ,जिन्दगी मेरी संगीत और इसकी साज तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
रंगीले सपनो का संसार तुम, इस मधुर जीवन का श्रंगार तुम
उम्मीदों की अभिसार तुम, जीवन में खुदा का उपहार तुम
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
लबों में लाये मुस्कान तुम्हारी बात ,तुम्हारे दीदार की आरजू दिन और रात
ख्वाबों में होती तुमसे मुलाक़ात , तुम हो बेशक जिन्दगी की सौगात
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
जिसकी हर एक अदा पर बन जाता ग़ज़ल ,जिसकी सादगी से शरमा जाता कमल
अंदाज जिसकी करती कायल , याद जिसकी करती घायल
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
जिंदगी के सपने संजोये जिसके साथ ,जिसके हाथों को थामने बेताब मेरे हाथ
जिंदगी ढूँढती जिसे पाथ-पाथ , चलेगी जिन्दगी जिसके साथ साथ
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?
ये सब संभावनाएं है ,संभव बनाने का आस तुम ,
ये सब कल्पनाएँ है , साकार बनाने का विश्वास तुम ,
आखिर कौन हो तुम ?, आखिर कौन हो तुम ?

Waah Gayaki Waah :)
ReplyDeleteक्या बात है भाई आग लगा दी तुमने
ReplyDeleteअब बस जिसके लिए लिखी है उसको सुना दो
बहुत बढ़िया तरीका है इकरार करने का
दिल में दबा वोह अनकहा राज़ हो तुम
इस कविता की प्रेरणा, और इसी का अंजाम हो तुम
तुम ही हो तुम, गायकी का संसार हो तुम
thank you sir ....aaj rat khawab me jab milunga tab kah dunga ..:-P
DeleteGayki jitna kuch tumne socha,lagta hai wo nahin hai ye
ReplyDelete"तुम "!!!!!!
Kiske pyaar me dub gaye Gayki tum? :p
ReplyDeleteye pta hota to TUM ki jagah uska name hi hota :-P
DeleteWow...It's amazing :-)
ReplyDelete:-)
Deletechha gaye bhai
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